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Wednesday, 3 August 2016

बहुत बड़े लीजेंड है माइकल - मनीष झा

"द लीजेंड ऑफ़ माइकल मिश्रा" यह नाम है उस हास्य फिल्म का जो कि ५ अगस्त को रिलीज़ होने  वाली है। इस फिल्म के निर्देशक हैं मनीष झा , जिन्होंने इस फिल्म से पहले गंभीर फ़िल्में ही बनायी हैं।  बिहार के रहने वाले मनीष की पहली डाक्यूमेंट्री फिल्म "वैरी वैरी साइलेंट फिल्म " को कान्स फिल्म फेस्टिवल में  सन २००२ का बेस्ट जूरी अवार्ड मिला था। सन २००३ में मनीष ने दिल को छू लेने वाली बहुत ही संवेदनशील फिल्म बनाई "मातृभूमि - ए नेशन विध ऑउट वीमेन " कन्या भ्रूण हत्या पर बनी इस फिल्म को भी देश - विदेश में कई अवार्ड मिले। इसके बाद २००७ में आयी फिल्म  "अनवर " को भी दर्शकों ने पसन्द किया था।  इसके बाद २००८ में फिल्म "मुम्बई कटिंग " में कई निर्देशकों ने अलग अलग कहानियों को निर्देशित किया था इनमे से एक मनीष भी थे , उनकी फिल्म का नाम था "एंड इट रैण्ड ", लेकिन अब मनीष एक नये ही अवतार में दर्शकों के सामने आ रहे हैं अरशद वारसी , अदिति राव हैदरी , बमन ईरानी और काजोय ईरानी की मुख्य भूमिका वाली हास्य फिल्म "द लीजेण्ड ऑफ़ माइकल मिश्रा " को लेकर।  सोचिये जिस फिल्म का नाम ही कुछ अजीब सा है उस फिल्म की कहानी कितनी अजीब होगी।  यही जानने के लिए हमने मनीष झा से मुलाकात की।  पेश हैं कुछ मुख्य अंश --

फिल्म का नाम कुछ अजीब है "द  लीजेंड ऑफ़ माइकल मिश्रा " कितने बड़े लीजेंड हैं यह आपके माइकल ?
बहुत बड़े लीजेंड है माइकल , उन्हें  बेपनाह प्यार है अपनी वर्षा शुक्ला से, उसे पाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हैं , यहाँ तक कि  ५०० साल तक जेल जाने को तैयार है. तो आप ही सोचिये कितने बड़े लीजेंड हैं वो। 
हैं। पटना के किडनैपिंग स्पेशलिस्ट है वो कुछ भी किडनैप करते हैं यानि की ज्यादा दूध देने वाली भैंस को भी किडनैप कर लेते हैं। दिमाग कम और दिल बहुत  बड़ा है माइकल का . 

क्या माइकल के किरदार के लिए ही आपकी पहली पसन्द थे ? जबकि आज तो बहुत नये नए हीरो भी हैं ?
हाँ बहुत नये हीरो हैं लेकिन कितने भी नये लड़के आ जाये कॉमेडी में अरशद की जो टाइमिंग है वो आज किसी भी कलाकार में नही है. इस फिल्म से पहले मैं अरशद से कभी मिला भी नही था लेकिन जब मैंने उसे फिल्म की कहानी सुनाई इंटरवल तक सुनने के बाद ही उसने हाँ कह दिया फिल्म के लिये। 

गम्भीर  फिल्मों से हास्य फिल्मों की ओर जाने का इरादा कैसे किया ?
अगरआप मेरी पिछली फिल्म "अनवर " देखें तो उसमें भी ब्लैक हयूमर था। हाँ लेकिन इस फिल्म की कहानी तो बहुत ही अलग है जब आप फिल्म देखेगे तब ही सच्चाई के बारें  में चलेगा। 

अरशद और बमन के बारें में तो समझ में आता है क्योंकि उन्होंने कई फ़िल्में साथ की है उनकी ट्यूनिंग अच्छी है लेकिन अदिति और काजोय ईरानी के बारें में बताइये ?
अदिति ने कुछ ज्यादा बड़ा काम अभी किया नही है लेकिन मुझे वो अच्छी लगी , लेकिन शुरू में मुझे लगा कि पता नही वो कर पायेगी कि  नहीं लेकिन जब हमने वर्क शॉप की और मिस पटना को बुलाया जिससे अदिति बिहारी भाषा बोलना सीख जायें।  एक महीने में ही उन्होंने उसकी कॉपी कर ली। वर्षा शुक्ला का बहुत अच्छा किरदार अभिनीत किया है उन्होंने। काजोय को जब मिलने स्टूडेंट्स ऑफ़ द ईयर में देखा था तभी मैंने सोचा था उन्हें अपनी फिल्म में कास्ट करूँगा। 

आपकी आने वाली फिल्मों के बारें में बात करें तो क्या फिर आप वापस गंभीर फ़िल्में बनायेगें ?
नही अभी मैं प्रेम कहानी ही बनाने वाला हूँ क्योंकि प्रेम कहानी बनाना मुझे ज्यादा चेलेंजिंग लग रहा है।

अनवर के बाद आपको बहुत समय अलग गया इस फिल्म को बनाने में ?
हाँ यूं कि जब मैंने अपनी शुरू की फ़िल्में बनायी उस समय मैं केवल २३ साल का युवा था बहुत जोश था मुझमें और मुझे अपनी दोनों ही फिल्मों के लिए अवार्ड भी मिल गये. मुझे लगा कि लोग कहते हैं कि लोग ऐसे ही कहते हैं मुम्बई में बहुत संघर्ष करना पड़ता है जबकि मैंने तो कुछ संघर्ष किया ही नही लेकिन २००७ और २०१४ के बीच के समय में मुझे सब समझ आ गया कि संघर्ष क्या होता है। इसके अलावा मेरे अपने कुछ व्यक्तिगत कारण भी रहे जिसकी वजह से फ़िल्में नही बना पाया लेकिन अब ऐसा नही होगा। 












सेक्स कॉमेडी में काम करने से दूर रहता हूँ --- अरशद वारसी


अरशद वारसी ने यूँ तो अनेकों फिल्मों  में अच्छी भूमिकाओं को अभिनीत किया है लेकिन दर्शक उन्हें सर्किट के नाम से ज्यादा जानते हैं।   अरशद ने वैसा भी होता है , सहर और जॉली एल एल बी जैसी गंभीर फिल्मों के साथ - साथ मुन्ना भाई एम बी बी एस, गोलमाल सीरीज, धमाल , इश्क़िया , डेढ़ इश्किया  जैसी हास्य फिल्मों में भी काम किया है। एक बार फिर अरशद दर्शकों को हँसाने के लिये आ रहे हैं प्यार में लीजेंड बन कर फिल्म " द लीजेंड ऑफ़ माइकल मिश्रा " में.  परदे पर जितना हसांते हैं अरशद उतना ही हास्य बातचीत के दौरान भी उनका चलता रहा।   

कितने लीजेंड हैं माइकल मिश्रा ? फिल्म की कहानी क्या है ?
बहुत बड़े लीजेंड हैं माइकल, पूरी तरह से प्यार में डूबे हुए हैं वर्षा शुक्ला के , उसके लिए कुछ भी करने के लिये तैयार हैं यहाँ तक कि  अपने किये अपराधों की ५०० साल की सज़ा भी भुगतने के लिये तैयार हैं। बहुत प्यारी सी और गहरी प्रेम कहानी बनाई है निर्देशक मनीष मिश्रा ने. 

वैसे बोमन और आपकी जोड़ी तो बहुत पुरानी हो गयी है लेकिन इस फिल्म में तो उनके बेटे कायोज भी हैं ?
हाँ मैंने और बोमन ने बहुत फिल्मों में साथ काम किया है मज़ा आता है उसके साथ, बहुत अच्छी ट्यूनिंग है हमारी। उसके बेटे के साथ भी मज़ा आया , वो भी अच्छा काम करता है बोमन की तरह। 

यह फिल्म देरी से रिलीज़ हो रही है , देरी से रिलीज़ होने पर कितना नुकसान होता है कलाकारों को ?
निर्माताओं को बहुत नुकसान होता है इसका। पैसा फँसा होता है उसका , कलाकार तो फिल्म के पूरी होने के बाद दूसरी फिल्मों में व्यस्त हो जाते हैं। 

 आज कल सेक्स कॉमेडी फ़िल्में बहुत आ रही हैं आपका क्या कहना है इस बारें में ?
अच्छी हैं उनके लिये जो इन फिल्मों में काम कर रहे हैं. एक दर्शक की तरह मैं इन फिल्मों को देखना पसन्द करता हूँ लेकिन मैं सेक्स कॉमेडी में काम  करने से दूर रहता हूँ क्योंकि मैं इसमें खुद को कॉम्फ़ोर्टेबल नहीं पाता हूँ।  हालांकि इंदु जी ने मुझे ऑफर भी की थी "ग्रैंड मस्ती' लेकिन मैंने मना किया मैंने उनके साथ "धमाल" की थी जिसमें सब कुछ उलट - पुलट था  उसमें मुझे मज़ा आया आगे भी करूँगा ऐसी फ़िल्में लेकिन सेक्स कॉमेडी  कभी नहीं।  कल जब मेरे बच्चे बड़े होंगे देखेगें कि  मैंने ऐसी फ़िल्में की हैं तब मेरे लिये बहुत मुश्किल होगा यह कहना कि बेटा मैंने पैसों के लिए यह फिल्म की थी. वैसे भी मैंने पैसे के लिये कोई भी फिल्म नहीं की. 

एक तरफ आप सहर जैसी गम्भीर फिल्म करते हैं और दूसरी ओर धमाल और गोलमाल जैसी फ़िल्में , कितना आसान होता है आपको ये फ़िल्में करना ?
 मुझे किसी भी तरह का अभिनय करने में कोई भी परेशानी नहीं होती है  एक ही साथ मैं सहर और धमाल जैसी फ़िल्में कर सकता हूँ। 
आप गम्भीर और हास्य सभी कुछ बहुत अच्छे से करते हैं फिर भी आपको हास्य फ़िल्में ही मिलती हैं क्यों ?
अच्छा है हास्य फ़िल्में तो मिलती हैं मुझे करने को। वैसे भी दर्शको को हास्य फ़िल्में ही ज्यादा पसन्द आती हैं  और कमाई भी करती हैं हास्य फ़िल्में। 

मुन्ना भाई सीरीज की अगली फिल्म कब आ रही है ?
सारा काम हो गया है फिल्म का। पहले संजू की बायोग्राफी बनेगी फिर शायद मुन्ना भाई,  या फिर राजू का जैसा मन करेगा। 

राजू हिरानी के बारें में कुछ बताइये ?

  बहुत ही अच्छा इंसान है उसकी वजह से ही मैंने "मुन्ना भाई एम बी बी एस" फिल्म  का सर्किट का रोल था नहीं तो मैं उस भूमिका को करने वाला नहीं था मकरन्द देशपांडे ने भी मना कर दिया था इस रोल को करने को. ऐसा बेकार किरदार था सर्किट का। मैं तो विनोद जी को बहुत ही आदर के साथ  मना करने गया था लेकिन वहाँ मैं राजू से मिला।  वैसे अगर आप फिल्म स्क्रिप्ट देखें तो उसमें सर्किट का कुछ काम नहीं है संजू के पीछे ५ लोग खड़े हैं और उनमें से १ को कुछ २ लाइनें ज्यादा बोलनी थी वही था सर्किट , लेकिन जब फिल्म की शूटिंग शुरू हुई तब राजू और मैंने सर्किट के किरदार को इम्प्रूव कियाऔर फिर जो सर्किट निकल कर आया वो आप सबके सामने है. 

जॉली एल एल बी - २ में आप नहीं हैं जबकि पहली फिल्म तो बहुत सफल रही थी ? क्या आप सरप्राइज नहीं हुए इस बदलाव के लिये, कहीं कोई धक्का नहीं लगा आपको ?
  नहीं कोई धक्का नहीं लगा मुझे, अक्षय हैं इसमें इस बार भी फिल्म सफल होगी। 

और कौन सी फ़िल्में आप कर रहे हैं ? 
 सनी देओल  के साथ भैय्या जी सुपरहिट के अलावा भी कुछ फ़िल्में हैं जिनके बारें में बाद मैं बात करूँगा।